वसंत पंचमी पर ही क्यों की जाती है, चार भुजाओं वाली ज्ञान और संगीत की देवी सरस्वती की पूजा?

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Saraswati worshiped 2019: हमारे देश में माघ महीना के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को वसंत पंचमी पर देवी सरस्वती की पूजा का पूर्व मनाया जाता है। इस पर्व पर बिशेष रूपर से चार भुजाओं वाली ज्ञान और संगीत की देवी माँ सरस्वती की पूजा आरधना की जाती है। साल 2019 में यह पर्व आज के दिन 10 फरवरी, रविवार को मनाया जा रहा है। माँ सरस्वती की पूजा आरधना करने से हमें ज्ञान की प्राप्ति होती है क्योकि माँ सरस्वती को ज्ञान की देवी है।

Saraswati worshiped 2019 –

इस पर्व को लेकर बहुत सारी मान्यताएं प्रचलित है जिनमे से एक यह भी मान्यता है। जब भगवान विष्णु की आज्ञा के अनुसार ब्रह्माजी ने सृष्टी की रचना किये। जिसमे मनुष्यों की रचना करने के बाद उन्हें लगा की सायद कुछ कमी रह गई है, जिसके कारन चारो ओर पृथिबी पर मौन छाया हुआ रहता है। उसके बाद ब्रह्माजी ने इस विषय पर भगवान विष्णु से चर्चा की और फिर उनकी आज्ञा के बाद ब्रह्मदेव ने एक चार भुजाओं वाली देवी की रचना किये।

इस देवी के एक हाथ में में वीणा तथा दूसरा हाथ वर मुद्रा में था, साथ ही तीसरे और चौथे हाथ में पुस्तक एवं माला थीं। उसके बाद ब्रह्मा जी ने देवी से वीणा बजाने का अनुरोध किया, जैसे ही देवी ने वीणा का मधुरनाद किया ततपश्चात संसार के समस्त जीव-जन्तुओं को वाणी प्राप्त हो गई और जलधारा में जैसे चेतना आ गई।

तपश्चात इस दृश्य को देखकर ब्रह्मा जी ने देवी का नाम वाणी की देवी सरस्वती कहा। देवी सरस्वती को भगवती, शारदा, वीणावादनी और वाग्देवी सहित अनेक नामों से भी पूजा जाता है। देवी सरस्वती ज्ञान और बुद्धि की देवी के रूप में जाना जाने लगा। संगीत की उत्पत्ति करने के कारण ये संगीत की देवी भी हैं, इस लिए वसंत पंचमी के दिन को इनके जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाने लगा।

वेदो में भी माँ सरस्वती का वर्णन किया गया है, जिनमे ऋग्वेद में भगवती माँ सरस्वती का वर्णन मिलता है। वसंत पंचमी का दिन को माँ सरस्वती का जन्मदिन माना जाता है, इसलिए इसदिन ज्ञान और बुद्धि की देवी की पूजा और आराधना की जाती है। …..Next