जानिए हनुमान जी को कैसे मिला था अमरत्व का वरदान, राम का नाम जपने वालो का करते है बेड़ापार, जानिए पूरी कथा

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Ram Sita blessed Hanuman immortality: भारत देश हमेसा से भगवानों का अवतार लेने की धरती के लिए जाना जाता रहा है। जब कभी भी धरती पर दुस्टो का अत्याचार बढ़ा तब-तब भगवान किसी ना किसी रूप में अवतार लेकर धरती पर अत्याचारियों और पापियों का नाश किये है। उन्ही अवतारों में से एक अवतार था बजरंगवली हनुमान का, इस अवतार को भगवान शिव का अवतार माना जाता है। त्रेता युग में भगवान शिव के अवतार हनुमान जी के बारे में जानते है।

Ram Sita blessed Hanuman immortality –

त्रेता युग में धरती पर सबसे ज्यादा तवाही और विध्वंश मचाने वाले रावण की मिटने के लिए भगवान विष्णु ने राम का अवतार लिए था। वही भगवान शिव शंकर ने राम भक्ति और राम की मदद करने के लिए हनुमान के रूप में अवतार लिए थे। बजरंगवली हनुमान जी के बारे में रामायण और महाभारत दोनों ही महाकाव्य में वर्णन मिलता है। शिव के सबसे महत्वपूर्ण अवतारों में महावली हनुमान का अवतार सबसे श्रेष्ठ अवतार माना जाता है।

बजरंगवली हनुमान एक ऐसे देव जिन्हें धरती पर अमरत्व का वरदान प्राप्त है –

आप को बता दे की बजरंगवली हनुमान एक ऐसे देवता थे जिन्हे इस धरती पर अमरत्व का वरदान प्राप्त है, साथ ही इनसे ना ही बलवान है। सदियों बीत जाने के बाद आज भी धरती पर एक मात्र जीवित देवता में भगवान हनुमान का नाम लिया जाता है। क्योकि भगवान बजरंगवली हनुमान को अमरत्व का वरदान प्राप्त है।

इस बात का जिक्र वाल्मीकि रामायण में किया गया है, जिसके अनुशार सीता माता की खोज में निकले हनुमान जी, माता सीता को खोजते खोजते भारत के दछिन में समुद्र तट तक पहुंच गए थे। वहाँ से फिर किसी कोई रास्ता नहीं दिख रहा था तभी वहाँ समुद्र तट पर जटायु के भाई संपाति ने बताया था इस समुद्र के उस पार के टापू है जिसका नाम श्रीलंका है। और वहां का राजा राछस राज रावण है वही माता सीता को हरण कर ले गया है।

जिसके बाद बजरंगवली हनुमान श्री राम नाम का नाम लेते हुए समुद्र के ऊपर से उड़कर श्रीलंका पहुंचे थे। वहां पहुंच कर हनुमान माता सीता को खोजते खोजते एक वाटिका में पहुंचे जहाँ पर माता सीता एक ब्रिछ के निचे बैठी थी और चारों तरफ राछसो का पहरा था। उस वाटिका का नाम अशोक वाटिका था जो आज भी श्रीलंका में मौजूद है।

माता सीता ने दिया था अमरत्व का वरदान –

माता सीता की खोज करने के हनुमान ने माता सीता को बताया की मै श्री राम का सेवक हुनुमान हु। जिसके बाद हनुमान ने माता को बताया प्रभु श्री राम आपको छुड़ाने के लिए बहुत ही जल्द श्री लंका आएंगे। ततपश्चात सभी बातो को सुन कर माता सीता प्रसन्न हो गई और हनुमान को इस पृथिवी पर अमरत्व का वरदान दिया। इसलिए महाबली हनुमान जी हर युग में भगवान श्री राम जी के भक्तों की रक्षा जरूर करते हैं।

वही आप को बता दे हनुमान चालीसा की एक चौपाई “अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता” “अस बर दीन्ह जानकी माता” में भी इस बात का उल्लेख मिलता है, इसका मतलब है कि आपको माता श्री जानकी से ऐसा वरदान मिला हुआ है जिससे आप किसी को भी आठों सिद्धियां और नौ निधियां दे सकते हैं।

श्री राम अपने बैकुंठ लोक प्रस्थान के समय भी कहि थी ये बाते –

साथ ही श्री राम जब अपने बैकुंठ लोक प्रस्थान कर रहे थे उस समय भी बजरंग बलि हनुमान को बताया था। तुमको तो अमरत्व वरदान मिला है, इस धरती पर जब कोई भी नहीं होगा तब तुम राम नाम लेने वालों का बेड़ा पार लगाओगे। एक समय ऐसा आएगा जब धरती पर कोई देव अवतार नहीं लेंगे, तब पापी लोगों की संख्या अधिक हो जाएगी तब तुम राम के भक्तों का उद्धार करोगे इसीलिए तुमको अमरता का वरदान मिला है।

तभी से हनुमान जी ने अपने अमरता के वरदान को समझ गए थे, और भगवान श्री राम जी की आज्ञा अनुसार आज भी धरती पर साक्षात विराजमान है जो लोग भगवान श्री राम जी के भक्त होते हैं उनका हनुमान जी बेड़ा पार लगाते हैं। जिस जगह पर राम जी का नाम लिया जाता है उस जगह पर हनुमान जी प्रकट जरूर होते हैं। …..Next