साबूदाना कैसे बनता है, क्या आप जानते हैं जानकर हो जायेंगे परेशान, वीडियो में देखें

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साबूदाने से सब लोग परीचित है। इसकी स्वादिष्ट खिचड़ी, खीर या बर्फ़ी लोगों को बहुत पसंद है। साबूदाना सैगो पाम के तन्नो से बनाया जाता है। लेकिन क्या आप जानते है इसकी निर्माण प्रक्रिया कैसी है? अगर आप नहीं जानते है तो इस लेख को पूरा पढ़ें, हम बताते हैं आपको साबूदाना कैसे बनता है? साबूदाना टैपियोका नामक कंद से बनाया जाता है। इस कंद में भरपूर मात्रा में स्टार्च पाया जाता है।

ये बात आप सब जान चुके है कि साबूदाना टैपियोका कासावा के गूदे से बनाया जाता है परंतु इसे बनाने की विधि इतनी अपवित्र होती है, आप जानकर हैरान रह जाओगे। तमिलनाडु प्रदेश में सालेम से कोयम्बतूर के रास्ते में साबूदाना बनानेवाली कई सारी कंपनियां है। इन कंपनियों के परिसर में भयंकर बदबू आती है। यह बदबू किस वजह से आती है इस सवाल का जवाब लेख पूरा पढने के बाद जरूर मिलेगा।

साबूदाना बनाने के लिए इस्तेमाल होनेवाली जड़ों को 25-40 फिट गहरी गड्डों में डालकर सड़ाया जाता है। इन जड़ो को सड़ाने के लिए गड्डों में पानी भर दिया जाता है। जड़ो को गलाने के लिए विशेष प्रकार के रसायनों का इस्तेमाल किया जाता है। यह जड़ें खुले मैदानों में लंबे समय तक गड़ो में पड़ी रहती है। इस प्रकार सड़ने के बाद तैयार गूदे को गर्मी देने के लिए इनके आसपास रात के समय बल्ब जलाए जाते है। रात के समय बल्बों के पास कई छोटे-मोटे जहरीले जीव आते है और इस गूदे के साथ समा जाते है।

कंपनी के मजदूरों द्वारा समय-समय पर इन गड़ो में पानी डलवाया जाता है। इस वजह से साबूदाने को सफेद रंग प्राप्त होने लगता है। जड़ो को सड़ाने का काम लगभग ५-६ महीनों तक चलता है इस प्रकिया के बाद तैयार स्टार्च को धूप में सुखाया जाता है। सूखने के बाद गाढ़े गूदे को मशीनों की सहायता से छनियों पर डालकर गोलीयों का आकार दिया जाता है। यह प्रक्रिया बेसन से बूंदी बनाने के समान होती है। इस प्रकार तैयार होनेवाली गोलियां नारियल तेल के साथ कड़ाई में भुनी जाती है औऱ अंत मे इन्हें गर्म हवा में सुखाया जाता है।

इनके बाद इस कीड़े-मकोड़े वाले गूदे को छोटे-छोटे आकर देकर पॉलिश किया जाता है। पॉलिश होने के बाद गोलियों को आकार, चमक और सफेदी के आधार पर छांटा जाता है औऱ बजार भेजा जाता है। इतनी लंबी प्रक्रिया के बाद मोतियों जैसा साबुदाना हमारे सामने आता है। कई लोगों को यह बात झूठी लग सकती है लेकिन इसकी सच्चाई जानने के लिए एक बार तमिलनाडु प्रदेश में सालेम से कोयम्बतूर के कंपनियों का दर्शन जरूर कीजिए।